अजमेर सुबह का वक्त।
रूह दरवाजे की तरफ जा रही थी कि तभी सूर्यांश ने उसका हाथ पकड़ लिया और एकदम से उसे अपनी गोद में उठाकर वहीं सोफे पर बैठ गया। रूह से देखकर बोला, “ये क्या हरकत है? छोड़ेंगे आप हमें? हम आपसे नाराज हैं, आपको फर्क नहीं पड़ता हमारी नाराजगी से?”







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