जैसलमेर, रात का वक्त।
जब से वृष्टि ने रूपाली की बात सुनी थी, तब से न जाने क्यों उसे एक बेचैनी हो रही थी। वो इस वक्त बेड पर बैठी कुछ सोच रही थी, ध्यान कहीं और था ना जाने कहां।

जैसलमेर, रात का वक्त।
जब से वृष्टि ने रूपाली की बात सुनी थी, तब से न जाने क्यों उसे एक बेचैनी हो रही थी। वो इस वक्त बेड पर बैठी कुछ सोच रही थी, ध्यान कहीं और था ना जाने कहां।

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