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Chapter, 148, 149, 150

राजस्थान, जैसलमेर।

सूर्यांश बालकनी के दरवाजे पर खड़ा रूह को देख रहा था, जो वहीं जमीन पर लेटी हुई थी। उसका एक हाथ स्विमिंग पूल में था और वो धीरे-धीरे अपने हाथ को पानी में चला रही थी। नज़रें आसमान पर टिकी हुई थीं। हल्के-हल्के बादल हो रखे थे, मतलब मौसम सुहाना था।

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