राजस्थान, जैसलमेर।
जैसे ही रूह की नज़र सूर्यांश की बगल में खड़ी मीतांशी पर गई, उसके एक्सप्रेशन फिर से बदल गए। वो अपने दांत पीसते हुए बोली, “यहां हम इन्हें मनाने की कोशिश कर रहे हैं और ये हैं कि कहीं और ही बिज़ी हैं। हुकुमसा, आप रुकिए। आपसे तो हम एक-एक करके बदला लेंगे।”







Write a comment ...