राध्या इस वक्त अद्वय के ऊपर गिरी हुई थी। वो उसकी आंखों में देखकर बोली, “क्या करूं, मुंह खोलना पड़ता है। अगर नहीं खोलूंगी ना, तो तुम अपनी मनमानी करोगे और मेरे साथ पता नहीं कैसे बिहेव करोगे। इसलिए मुझे अपनी जुबान चलानी पड़ती है।”
अद्वय उसकी आंखों में देखकर बोला, “अगर मुंह खोलना है तो कहीं और खोलो... you know what I mean।”







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