
राजस्थान, जोधपुर। शाम का वक्त था। सूर्यांश इस वक्त अपने कमरे में था और शांति वहाँ नहीं थी। हालाँकि उसे जानने में भी इंटरेस्ट नहीं था कि वो कहाँ है। तभी किसी ने कमरे का दरवाज़ा खटखटाया, तो सूर्यांश ने जाकर दरवाज़ा खोला। वहाँ कोई नहीं था। उसकी नज़र नीचे गई, जहाँ पर एक लेटर रखा हुआ था। उसने वो लेटर उठाया और उसे पढ़ते हुए बोला, “अगर अपनी बीवी को ज़िंदा देखना चाहते हो तो अभी के अभी चुपचाप हवेली के पीछे आओ, बिना किसी की नज़र में आए। और अगर तुम नहीं आए, तो तुम्हारी बीवी के साथ क्या होगा, इस चीज़ का तुम्हें अभी अंदाज़ा नहीं है। और मेरी धमकी को हल्के में बिल्कुल भी मत लेना।”
उस लेटर को पढ़ने के बाद सूर्यांश के एक्सप्रेशन पूरी तरह से बदल गए। वो मन ही मन खुद से बोला, “व्हाट द फक, क्या करूँ? अगर शांति को कुछ हुआ तो प्रॉब्लम हो जाएगी। वो मेरी वजह से यहाँ है और मैं उसे कुछ होने नहीं दे सकता।”







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