
मुम्बई, इंडिया। शाम का वक्त।
नज़्म के हाथ में वो net bra थी, जिसे वो बार-बार उलट-पलट कर देख रही थी; जैसे समझने की कोशिश कर रही हो कि इसे पहनने का क्या मतलब है। कपड़े इतने पतले थे कि सब कुछ clearly visible होने वाला था। उसकी उंगलियाँ हल्की-सी काँप रही थीं। उसने धीरे से bra को touch किया और बोली, "ये तो बस नाम की bra है, इसमें तो कुछ छिपेगा ही नहीं है!"








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