
इंदौर इंडिया
मुक्ति की आंखें पूरी तरह से खुल चुकी थीं और अब जाकर उसे एहसास हुआ था कि ये कोई सपना नहीं है, बल्कि उसकी बगल में साक्षात रुध्रित महाराज लेटे हुए हैं। जैसे ही उसने रुध्रित को देखा, उसकी सांस अटक गई। कमरे की हल्की रोशनी में रुध्रित की आंखों में एक अलग ही चमक नजर आ रही थी।










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