
राजस्थान, जैसलमेर।
वो बैठी उसके बालों को सहला रही थी और अग्नि ने अपनी आंखें बंद कर लीं। आशिका की उंगलियों का वो स्पर्श उसे किसी मरहम की तरह लग रहा था। उसकी उंगलियां अग्नि को सुकून पहुंचा रही थीं। ये वो सुकून था, जो वो चार सालों से ढूंढ रहा था। उसे सुकून को ढूंढते हुए तो उसकी ये हालत हो चुकी थी और अब जाकर उसे वो सुकून मिला था। न जाने कब उसकी आंख लग गई, उसे पता ही नहीं चला। कुछ दवाइयों का असर था, तो कुछ आशिका की मौजूदगी का।











Write a comment ...