
इंदौर, इंडिया, मध्य प्रदेश।
रुध्रित बालकनी में खड़ा हुआ था। उसने रेलिंग को इतनी मजबूती से अपने हाथों में जकड़ रखा था कि उसके हाथों की नसें साफ़ दिखाई दे रही थीं। गुस्सा और फ्रस्ट्रेशन उसके चेहरे पर साफ़ नज़र आ रहे थे। वहीं मुक्ति कमरे के बीचों-बीच खड़ी थी, उसके कानों में लावण्या के शब्द गूंज रहे थे— "डेढ़ महीने की प्रेग्नेंसी... रुध्रित का बच्चा।"










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