
लंदन।
अगली सुबह आशिका ने इतने हड़कांडे अपना लिए थे कि अब उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या करे। अग्नि था कि पिघलने को तैयार ही नहीं था। वो अभी भी अग्नि की शर्ट में थी, क्योंकि उसके पास कपड़े नहीं थे। सुबह हो चुकी थी। वो अपने कमरे से बाहर निकली तो उसके बाल बिखरे हुए थे, आंखें हल्की सी उनींदी थीं। वहां से सीधा नीचे की तरफ बढ़ गई वो। जैसे ही हॉल में पहुंची, उसके कदम अपनी जगह ठिठक गए।










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