
इंदौर, इंडिया, मध्य प्रदेश।
शाम का वक्त। रुध्रित ऑफिस से जब घर आया, तो उसकी नजर हॉल में बैठी वैदेही पर गई और उसकी बगल में बैठी लावण्या पर। हॉल का माहौल काफी अजीब था। लावण्या इस वक्त रो रही थी। वो रोते हुए बोली, "आंटी, मुझे नहीं पता था कि मुक्ति मुझसे इतनी नफरत करती है। जब आप घर से बाहर गई थीं, तो वो मेरे पास आई थी। उसने मुझसे कहा कि अगर मैं इस घर में रही, तो वो मेरे बच्चे को नुकसान पहुँचा देगी। आखिर मेरा बच्चा भी तो रुध्रित का ही खून है ना?"










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