
इंदौर, इंडिया, मध्य प्रदेश
रुध्रित के होठों पर इस वक्त मिस्टीरियस मुस्कुराहट थी, जो शायद किसी बड़े तूफान के आने से पहले की खामोशी थी। उसने एक नजर लावण्या को देखा और चुपचाप जाकर सोफे पर बैठकर, अपने एक पैर पर दूसरा पैर चढ़ाते हुए बोला, "बैठो लावण्या! खड़े-खड़े ड्रामा करोगी तो थक जाओगी और अभी तो शुरुआत हुई है, आगे बहुत कुछ बाकी है।"










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