
भोपाल, इंडिया (मध्य प्रदेश)
मुक्ति ने अपनी आंखें बंद करनी चाहीं, तो रुध्रित ने तुरंत उसके जबड़े को मजबूती से पकड़ लिया इतना कि उसकी गालों पर उसकी उंगलियों के निशान उभरने लगे थे। वो अपने दांत पीसते हुए गुर्राकर बोला, "नजरें मत चुराओ मुझसे! लुक एट मी (Look at me)! मैंने कल रात भी कहा था कि मुझसे दूर जाने की कोशिश मत करना और तुम्हारी आंखें बंद करने से ये सच नहीं बदलेगा कि तुम इस वक्त मेरे सामने हो। तुमने क्या सोचा था, कल रात मैं सो गया तो तुम जीत गईं? रुध्रित वर्धन अपने होश खो सकता है, पर अपना हक कभी नहीं भूलता।"











Write a comment ...