
लंदन। शाम का वक्त।
अग्नि के होठों पर इस वक्त बेहद डार्क और डेंजरस मुस्कुराहट थी। उसने आशिका की कमर पर अपनी उंगलियों की पकड़ को और भी ज्यादा टाइट कर दिया था, जिससे आशिका के मुंह से एक दबी हुई सिसकी निकल गई। उसने आशिका को खुद से और भी करीब किया, यहां तक कि उनके बीच हवा का भी फासला नहीं बचा था। आशिका को अग्नि की बॉडी अपनी बॉडी से रब होते हुए महसूस हो रही थी और इस वक्त उसकी हार्डनेस आशिका को अपने ass crack में फील हो रही थी।











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