
लंदन, रात का वक्त।
अग्नि इस वक्त आशिका के ऊपर झुका उसके चेहरे को देख रहा था और उसकी आँखों में इस वक्त लस्ट और दीवानगी नजर आ रहे थे। उसने अपने पूरे शरीर का वजन आशिका के नाजुक बदन पर डाल दिया, जिससे आशिका की साँसें और भी ज्यादा तेज चलने लगीं। अग्नि ने उसकी गर्दन पर अपने होंठ रखे और फुसफुसाते हुए बोला, "थोड़ा सा नहीं मेरी जान, आज पूरा बर्दाश्त करना पड़ेगा।"











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