
मुंबई, इंडिया। दीवान मेंशन।
मेहर की वो मासूम बातें अक्षांश को पूरी तरह से हारा हुआ महसूस करा रही थीं। उसकी उंगलियाँ मेहर के रेशमी बालों में फिसल रही थीं, लेकिन उसकी नजर मेहर के उन सजे हुए हल्के भीगे होठों पर अटकी थी, जिन पर अभी-अभी उसने अपनी शिद्दत की मोहर लगाई थी। कमरे की हल्की रोशनी में मेहर का चेहरा एकदम से दमक रहा था और blanket के अंदर छुपा उसका नाजुक बदन अक्षांश की धड़कनों को और तेज कर रहा था।











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