
लंदन, सुबह का वक्त।
अग्नि आशिका को अपनी बाहों में समेटे हुए सीधा बाथरूम की तरफ बढ़ गया। आशिका ने अपनी दोनों बाहें उसकी गर्दन के चारों तरफ लपेट रखी थीं और उसका चेहरा अभी भी अग्नि के मजबूत सीने में छुपा हुआ था। अग्नि ने उसे बाथटब के किनारे पर धीरे से बैठाया, जिसमें पहले से ही गुनगुना पानी भरा हुआ था।











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