
मुंबई इंडिया, पेंटहाउस
यज्ञ कुछ देर तक खामोश रहकर रिद्धिमा के उस खिलखिलाते चेहरे को देखता रहा। उसकी डार्क, इंटेंस नज़रें रिद्धिमा के होठों पर टिक गईं। कमरे की हल्की रोशनी में उसका चेहरा और भी ज़्यादा निखर रहा था। यज्ञ ने अपनी पोजीशन बदली और थोड़ा सा उठकर कोहनी के सहारे खुद को टिकाया, जिससे उसका चौड़ा सीना रिद्धिमा के और करीब आ गया।











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