
राजस्थान जैसलमेर
वृत्ति इस वक्त कृत्य की गोद में बैठी हुई थी और वो घूरते हुए कृत्य को देख रही थी। कृत्य ने उसके हाथों को अपनी कॉलर से हटाने की कोशिश की थी, लेकिन वृत्ति ने उसे और भी ज्यादा मजबूती से पकड़ा और वो खुद उसके और भी ज्यादा करीब चली आई। दोनों के जिस्म के बीच अब हवा की भी जगह नहीं बची थी। वृत्ति की भारी सांसें कृत्य के होठों को छू रही थीं। वो इरिटेट होते हुए बोली, "हवस भरी है ना तुम्हारे अंदर? देन शांत इट विद मी।"











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