
मुंबई, इंडिया, रस्तोगी हाउस।
आर्या की बातें सुनकर क्रियान ने हल्का सा उसके कान पर बाइट किया और अपनी पकड़ उसकी कमर पर और ज़्यादा कस दी इतनी कि दोनों के बदन के बीच हवा गुज़रने की भी जगह नहीं बची। उसने अपना चेहरा आर्या के कान के पास झुकाया और अपनी गर्म साँसें उसकी गर्दन पर छोड़ते हुए धीमी आवाज़ में बोला, "तो पागल हो जाओ ना, बेबी गर्ल! किसने रोका है? और रही बात पागलखाने की, तो तुम्हें किसी और asylum में जाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। मेरी ये बाहें, मेरा बेड, यही तुम्हारा परमानेंट asylum होगा, जहाँ मैं तुम्हारा डॉक्टर बनूँगा और तुम मेरी पेशेंट, जिसका इलाज मैं हर रात अपने तरीके से करूँगा।"













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