
इन्दौर, इंडिया।
मुक्ति इस वक्त एक अंधेरी सी जगह पर थी। उसे चेयर से बाँध कर रखा गया था। बेहोशी में धीरे-धीरे उसकी आँखें फड़फड़ाने लगीं। उसने आँखें खोल कर देखा, तो खुद को एक अंधेरी जगह पर देख कर वो घबरा गई। उसने उठने की कोशिश की, तो हाथ-पैर बँधे हुए थे और अब वो और भी ज्यादा पैनिक करने लगी थी। वो अपने हाथों को खोलने की कोशिश कर रही थी, लेकिन इतना भी आसान नहीं था।













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