
इटली, शाम का वक्त। जेसिका शॉपिंग पर गई थी और अभी तक वापस नहीं आई थी। वहीं ऋद्धिया इस वक्त टेरिस पर थी। बेहद खूबसूरत मौसम था, उसने खुद को अपनी बाहों में समेटा हुआ था और वो ठंडी-ठंडी हवा को महसूस कर रही थी। उसकी नज़र सामने टिकी हुई थी, वो बस दूर-दूर तक फैले शहर को देख रही थी और उसके होठों पर एक अजीब सी मुस्कुराहट थी, जैसे कोई अपनी बर्बादी पर मुस्कुरा रहा हो। वो धीरे-धीरे रेलिंग के पास आई और आराम से अपने हाथ रेलिंग पर टिका कर खड़ी हो गई।
वो कुछ पल तक खामोशी से खड़ी रही और फिर धीरे से बोली, "बात करनी है तुम्हें मुझसे?"













Write a comment ...