
बनारस, इंडिया — रात का वक्त।
ऋषिका इस वक्त रुद्राक्ष के बेहद करीब खड़ी हुई थी, और रुद्राक्ष गहरी-गहरी सांस लेते हुए उसे ही देख रहा था। वो धीरे से बोला, “जाओ यहां से, लिटिल फेयरी, वरना बहुत देर हो जाएगी। मैं कंट्रोल नहीं कर पाऊंगा, और मैं नहीं चाहता कि तुम्हारे साथ कुछ ऐसा करूं जबरदस्ती। प्लीज, जस्ट मुझे मेरी हाल पर छोड़ दो।”
रुद्राक्ष की हालत सच में बहुत खराब थी, और उसे इस तरह देखकर ऋषिका का दिल बेहद जोरों से धड़क रहा था। उसने धीरे-धीरे अपने कदम दरवाजे की तरफ बढ़ा दिए। तो रुद्राक्ष ने गहरी सांस ली, और वो बेड की तरफ बढ़ गया। तभी उसे कुछ महसूस हुआ। उसने पलटकर देखा तो ऋषिका उसके पीछे खड़ी हुई थी।
ऋषिका को देखकर वो जल्दी से बोला, “क्या हुआ? तुम गई क्यों नहीं?”
ऋषिका ने धीरे से रुद्राक्ष के सीने पर हाथ रखा और बोली, “आपको इस हाल में छोड़कर नहीं जा सकती। जब मुझे आपकी हालत समझ में आ रही है, तो मैं आपको ऐसे कैसे छोड़कर चली जाऊं?”
रुद्राक्ष ने ऋषिका के हाथ को पकड़ा और बोला, “तुम्हें अंदाजा है कि तुम खुद के लिए क्या मुसीबत खड़ी कर रही हो। मैं अपने होश में नहीं हूं। होश खो दूंगा मैं, और तुम्हें तकलीफ होगी, बहुत ज्यादा। वो तकलीफ मैं तुम्हें नहीं देना चाहता।”









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