
बीकानेर, इंडिया।
रात का वक्त।
वर्चस्व की उंगली इशरत के होठों पर थी। इशरत चुपचाप वर्चस्व की आंखों में देख रही थी। उसकी आंखों में एक अलग ही एहसास नजर आ रहा था और वो उन एहसासों में डूब रही थी। वर्चस्व ने एकदम से उसे अपनी गोद में उठाया और उसे बेड की तरफ लेकर बढ़ गया। उसने इशरत को बेहद आहिस्ता से बेड पर लेटाया, जैसे वो कोई कांच की गुड़िया हो और उसके ऊपर झुकते हुए बोला, "बीबी, तुम्हें पता है मेरे दिमाग में इस वक्त क्या चल रहा है?"
इशरत ने खोए हुए स्वर में पूछा, "क्या चल रहा है?"
वर्चस्व उसके होठों पर अपनी गर्म सांसें छोड़ते हुए बोला, "तुम्हारे साथ रोमांस करने का मन कर रहा है। You know what? दुश्मन के घर में रोमांस करने का एक अलग ही मजा है।"
वर्चस्व की बात सुनकर इशरत की सांस जैसे उसके हलक में अटक गई। उसकी आंखों में डर और डिजायर के बीच एक अजीब सी जंग चल रही थी। वर्चस्व ने अपना हाथ धीरे से उसके गाल पर रखा और अपने अंगूठे से उसके होंठ को हल्के से दबाया।













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