
शिमला, इंडिया।
कृतांश की हरकत देखकर एहसास की आंखें फैल गईं। वो अपने हाथ खींचते हुए बोली, "कृतांश, व्हाट आर यू डूइंग? जस्ट लीव मी! ये क्या कर रहे हो? मेरे हाथ छोड़ो!"
कृतांश के होठों पर इस वक्त एक डार्क मुस्कुराहट थी। वो मुस्कुराते हुए बोला, "वही कर रहा हूं जो मुझे करना चाहिए जान। मुझे कुछ ट्राई करना है, समथिंग नया। अब तुमने मुझे एक टैग दे रखा है 'ठरकी' का, एंड यू नो व्हाट मैं हूं! मेरे अंदर बहुत ठरक है और वो ठरक मैं अपनी बीवी के ऊपर निकालूंगा। अब बीवी तुम हो मेरी, किसी और के पास तो जा नहीं सकता और जाना भी नहीं चाहता, क्योंकि किसी और की औकात नहीं है कृतांश वाधवा के करीब आने की। सिर्फ तुम हो जिसके पास मैं आ सकता हूं और तुम्हें खुद के करीब आने दे सकता हूं।"
बेचारी एहसास, हवा टाइट हो रखी थी उसकी। उसे डर लग रहा था कृतांश को देखकर, क्योंकि पहली बार जब वो लोग एक दूसरे के करीब आए थे, जब उन लोगों ने एक दूसरे को फील किया था, तब उसकी हालत खराब हो गई थी। और आज... आज तो कृतांश अलग ही मूड में नजर आ रहा है, तो आज पता नहीं वो उसके साथ क्या करने वाला है।
वो अपना थूक निगलते हुए बोली, "देखो, ये हमारा सेकंड टाइम है, राइट? तो थोड़ा सा तो कंट्रोल करो। ये सारी हरकतें हम बाद में भी तो कर सकते हैं ना, जिंदगी पड़ी है।"
कृतांश अपना सिर हिलाकर बोला, "बिल्कुल भी नहीं! हनीमून पर आए हैं हम जान, और हनीमून पर नहीं करेंगे तो क्या घर पर करेंगे सबके बीच में? गलती से भी अगर तुम चिल्लाईं और किसी ने सुन लिया तो क्या सोचेगा कि मैं तुम्हें टॉर्चर कर रहा हूं? बिल्कुल भी नहीं। यहां तुम जितना भी चीखोगी, चिल्लाओगी, किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि ये हमारा हनीमून स्वीट है, तो यहां तो ये सब नॉर्मल है।"
















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