
शिमला, इंडिया।
शाम का वक्त, एहसास इस वक्त अपने होटल रूम में ही थी। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर उसका पति क्या प्लान कर रहा है, क्या करने वाला है वो? क्योंकि सुबह से वो गया था और अभी तक वापस नहीं आया था। एहसास खुद से बोली, "ऐसी भी क्या प्लानिंग करनी है? मतलब पूरा दिन लग गया! क्या खतरनाक प्लान कर रहा है? कहीं मैंने हां करके मुसीबत तो मोल नहीं ले ली? और अगर हां नहीं करती तो फिर वो कलह शुरू हो जाता। सीरियसली, ओह गॉड! कहां फंस गई हूं मैं?" बेचारी सच में इस वक्त फंसी हुई थी।
तभी किसी ने होटल रूम की डोर बेल बजाई। उसने जाकर दरवाजा खोला तो सामने इस वक्त एक आदमी खड़ा हुआ था। उसे देखकर वो धीरे से बोली, "जी?"
उस आदमी ने वो पैकेट एहसास की तरफ बढ़ाया और बोला, "मिस्टर वाधवा ने आपके लिए भेजा है। आप रेडी हो जाइए, नीचे गाड़ी आपका इंतजार कर रही है।" एहसास ने चुपचाप पैकेट लिया और दरवाजा बंद करके वो अंदर आ गई। उसने वो पैकेट खोलकर देखा तो उसमें एक रेड कलर की साड़ी थी और उसमें एक नोट भी था। एहसास ने वो नोट उठाकर खोला और पढ़ा—
"सुहागरात तो हमारी हुई नहीं, क्योंकि शादी जिस कंडीशन में हुई थी उसके बाद वो पॉसिबल नहीं था। लेकिन आज की रात हमारी सुहागरात है और मैं चाहता हूं कि तुम एक न्यूली मैरिड वूमेन की तरह तैयार होकर आओ। आई एम वेटिंग, जान!"
जैसे ही एहसास ने ये लेटर पढ़ा, उसके दिल की धड़कन बढ़ गई थी। उसने अपने सीने पर हाथ रखा और बोली, "ये सच में पागल हो गया है ये आदमी! पर जो भी है, करना पड़ेगा।" उसे भी एक अलग ही एक्साइटमेंट और एक अलग ही फीलिंग आ रही थी। उसने उस पैकेट से साड़ी निकाली। साड़ी बहुत खूबसूरत थी— डार्क रेड कलर की शाइनिंग सिल्क। और उसका ब्लाउज इतना डीप था कि पहनने के बाद उसकी गर्दन और क्लेविकल लाइन पूरी तरह से नजर आने वाली थी। साथ में शेपवियर और उसकी ज्वेलरी भी थी। वो कुछ पल और साड़ी को देखती रही और फिर धीरे से बोली, "आज रात मेरी सुहागरात है और वो भी शिमला में... पता नहीं क्या होगा!"
















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